<rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"><channel><title>themooknayak</title><link>https://www.themooknayak.com</link><description>The Mooknayak - आवाज़ आपकी</description><atom:link href="https://www.themooknayak.com/stories.rss" rel="self" type="application/rss+xml"></atom:link><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 13 Oct 2026 14:50:04 +0530</lastBuildDate><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><item><title>&apos;डरपोक तानाशाह ने जंतर-मंतर छीना, अब पूरा देश बनेगा प्रदर्शन स्थल&apos;, हिरासत में पुलिस प्रताड़ना पर जमकर बरसे CJP चीफ अभिजीत दिपके</title><link>https://www.themooknayak.com/bharat/abhijeet-dipke-slams-pm-modi-delhi-police-jantar-mantar-protest</link><comments>https://www.themooknayak.com/bharat/abhijeet-dipke-slams-pm-modi-delhi-police-jantar-mantar-protest#comments</comments><guid isPermaLink="false">13b44f0c-9d9c-4765-b6e9-b573063a6aab</guid><pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:56:27 +0530</pubDate><atom:updated>2026-10-13T12:56:27.414+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>Rajan Chaudhary</atom:name><atom:uri>/api/author/1715905</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="1152" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-08-01/ee20m9nx/%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9A-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0" width="2048"><media:title type="html"><![CDATA[ अभिजीत दीपके, कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ अभिजीत दीपके, कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-08-01/ee20m9nx/%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9A-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>भारत</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>नई दिल्ली:</strong> कॉकक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले सप्ताह निवारक हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से भारी प्रताड़ना दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'डरपोक तानाशाह' करार देते हुए जंतर-मंतर को विरोध स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर तीखा हमला बोला है।</p><p>अपने पैतृक गांव हिंगोली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डिपके ने पुलिस के बर्ताव का विस्तृत जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें उनकी दादी के निधन की दुखद खबर दी थी। डिपके के अनुसार, पुलिस का मकसद सिर्फ उन्हें और शोक में डूबे उनके बीमार माता-पिता को मानसिक तनाव देना था।</p><p>उन्होंने पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे सिर्फ निधन की सूचना देने आए थे, तो रात 3:30 बजे गिरफ्तारी के कागजात लेकर क्यों पहुंचे थे। उन पर उसी वक्त उन कागजातों पर हस्ताक्षर करने का अनुचित दबाव बनाया गया, जो सीधे तौर पर मानसिक प्रताड़ना थी।</p><p>सीजेपी नेता ने बताया कि खबर सुनने के बाद उन्होंने पुलिस से अपने चचेरे भाई से बात कराने का अनुरोध किया था, जो उस वक्त उनकी दादी के पास मौजूद था। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट बताया था कि उनके माता-पिता अस्वस्थ हैं, इसलिए वे सीधे उन्हें फोन नहीं करना चाहते। बावजूद इसके, पुलिस ने उन्हें अपने फोन से भाई का नंबर तक निकालने की इजाजत नहीं दी और माता-पिता को ही कॉल करने के लिए मजबूर किया। डिपके ने अब दिल्ली पुलिस से मांग की है कि वह इस घटना का पूरा और अनएडिटेड फुटेज सार्वजनिक करे।</p><p>जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की मान्यता से बेदखल करने के सरकार के कदम पर भी डिपके ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि आज मोदी ने जंतर-मंतर से प्रदर्शन का अधिकार छीना है, कल वे लोकतंत्र को ही खत्म कर देंगे। डिपके ने तंज कसते हुए कहा कि तानाशाह को कभी भी प्रदर्शन स्थल से परेशानी नहीं थी, बल्कि उसे लोगों के विरोध करने के विचार से ही डर लगता है।</p><p>उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए लिखा कि जंतर-मंतर को अब एक वॉर जोन में तब्दील कर दिया गया है। उनका कहना था कि भले ही सरकार ने उस जगह को छीन लिया हो, लेकिन अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा। सोमवार 12 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के प्रति उन्होंने अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता जाहिर की।</p><p>डिपके ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की यह सोच बिल्कुल गलत है कि एक जगह पर पाबंदी लगाने से विरोध की आवाजें दब जाएंगी। लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे लोगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर महज एक स्थान नहीं है, बल्कि यह प्रतिरोध की वह अजेय भावना है जिसे कोई भी ताकत कभी नहीं छीन सकती।</p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/society/deoria-man-death-police-assault-allegation-protest-barhaj">UP: दरोगा पर मारपीट का आरोप, शख्स ने खाया जहर, चौकी के बाहर शव रखकर परिजनों का प्रदर्शन</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/bharat/karnataka-hc-quashes-56-percent-reservation-siddaramaiah-attacks-bjp">कर्नाटक में 56% आरक्षण कानून रद्द होने पर भड़के सिद्धारमैया, बोले- 'आरक्षण खैरात नहीं, बीजेपी ने सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया था इस्तेमाल'</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/bharat/delhi-protest-live-updates">12 अक्टूबर Delhi Protest: 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' में उमड़ा जन सैलाब; मोदी-शाह के खिलाफ़ दिखा आक्रोश</a></aside>]]></content:encoded></item><item><title>MP: चोरी के शक में 3 दलित नाबालिगों की पिटाई, आधे सिर मुंडवाए; डर के कारण स्कूल जाना छोड़ा!</title><link>https://www.themooknayak.com/dalit/mp-3-dalit-minors-beaten-on-suspicion-of-theft-half-their-heads-shaved-stopped-going-to-school-out-of-fear</link><comments>https://www.themooknayak.com/dalit/mp-3-dalit-minors-beaten-on-suspicion-of-theft-half-their-heads-shaved-stopped-going-to-school-out-of-fear#comments</comments><guid isPermaLink="false">ce47c3a1-fe1d-4481-af3b-bcbd5b450bd8</guid><pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:55:33 +0530</pubDate><atom:updated>2026-10-13T12:55:33.188+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>Ankit Pachauri</atom:name><atom:uri>/api/author/1715907</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="782" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-13/a58ui9tj/1002623443.png" width="1220"><media:title type="html"></media:title><media:description type="html"></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-13/a58ui9tj/1002623443.png?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>दलित</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में चोरी के शक में अनुसूचित जाति वर्ग के तीन नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट करने, उनके सिर के आधे बाल मुंडवाने और गांव में अपमानित करने का मामला सामने आया है। बच्चों की उम्र 12 से 15 साल के बीच बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि ग्रामीणों ने बच्चों पर मोटर पंप चोरी करने का संदेह जताते हुए उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की। बच्चों के सिर के आधे बाल मुंडवा दिए गए और उन्हें गालियां देकर अपमानित किया गया।</p><p>घटना के बाद से तीनों बच्चे डरे हुए हैं। परिजनों के मुताबिक, बदनामी और दोबारा प्रताड़ित किए जाने के डर से बच्चे घर से बाहर निकलने में भी घबरा रहे हैं। उन्होंने स्कूल जाना तक छोड़ दिया है। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मामले में पुलिस अधीक्षक ने बरगवां थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए हैं।</p><p><strong>सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बंधक बनाने का आरोप</strong></p> <p>परिजनों के अनुसार, घटना 1 अक्टूबर की है। आरोप है कि उस दिन सुबह करीब 9 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को बंधक बनाकर रखा गया। बच्चों पर मोटर पंप चोरी करने का आरोप लगाया गया था। इसी संदेह के आधार पर उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किए जाने की बात कही गई है।</p><p>परिजनों का आरोप है कि बच्चों के सिर के आधे बाल भी मुंडवा दिए गए, जिससे उन्हें गांव में अपमान का सामना करना पड़ा। इस घटना का बच्चों पर मानसिक असर पड़ा है। वे लोगों के सामने जाने और स्कूल लौटने से डर रहे हैं।</p><p>आरोपियों में गोविंद सिंह, बलराम सिंह, इंद्रभान सिंह और हरिनारायण बैस के नाम सामने आए हैं। हालांकि, इन लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।</p><p><strong>पीड़ित बच्चे ने सुनाई आपबीती, पेड़ से बांधकर पीटने का आरोप</strong></p> <p>मामले में 13 वर्षीय एक पीड़ित बच्चे ने बताया कि उसे चोरी के मामले में फंसाया जा रहा है। बच्चे के मुताबिक, वह अपनी मां के कपड़े लेने गया था। रास्ते में बुद्ध सिंह गोंड नाम के व्यक्ति ने उससे कहा कि वह उसे छोड़ देगा। लेकिन आरोप है कि उसे उसके बताए स्थान पर ले जाने के बजाय जंगल की ओर ले जाया गया।</p><p>पीड़ित ने बताया कि वहां उससे मोटर चोरी करने को लेकर पूछताछ की गई और उसके साथ मारपीट की गई। बच्चे ने बुद्ध सिंह और गोविंद सिंह पर पिटाई करने का आरोप लगाया। उसने यह भी कहा कि गोविंद सिंह ने उसे पेड़ से बांधकर पीटा और उसके सिर के बाल मुंडवा दिए।</p><p>बच्चे की आपबीती से पता चलता है कि घटना के बाद वह डरा हुआ है। हालांकि, उसके बयान में लगाए गए आरोपों और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।</p><p><strong>थाने में सुनवाई नहीं हुई, परिजनों का आरोप</strong></p> <p>पीड़ित बच्चों के परिजनों का कहना है कि वे घटना की शिकायत लेकर बरगवां थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और अजाक थाने का रुख किया।</p><p>परिजनों ने मांग की है कि बच्चों के साथ कथित मारपीट, उन्हें बंधक बनाने, सिर मुंडवाने और जातिसूचक गालियां देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, बच्चों को सुरक्षा दी जाए, ताकि वे बिना किसी डर के स्कूल जा सकें और सामान्य जीवन में लौट सकें।</p><p>परिजनों के मुताबिक, घटना के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कम उम्र में इस तरह के कथित अपमान और हिंसा का सामना करने के कारण वे मानसिक दबाव में हैं। ऐसे में परिवार चाहता है कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करे।</p><p><strong>एसपी बोले- दोनों पक्षों के बीच हुआ था समझौता</strong></p> <p>पुलिस अधीक्षक शियाज केएम ने बताया कि बच्चों पर मोटर पंप चोरी करने के आरोप थे। उनके अनुसार, ग्रामीणों ने बच्चों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। एसपी ने यह भी कहा कि 1 अक्टूबर को ही आरोपी और पीड़ित पक्ष के बीच समझौता हो गया था।</p><p>हालांकि, अब परिजनों ने बच्चों के साथ मारपीट करने, सिर के बाल मुंडवाने और जातिसूचक गालियां देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए एसपी ने बरगवां थाना प्रभारी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।</p><p>एसपी के मुताबिक, जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।<br></p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/tribal-news/mp-12-tribal-homes-demolished-and-crops-destroyed-in-sehores-kosmi-village-leader-of-the-opposition-asks-why-tribal-families-should-be-uprooted-amidst-the-tussle-for-power">MP: सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के 12 मकान तोड़े, फसलें भी नष्ट, नेता प्रतिपक्ष ने कहा- सत्ता की खींचतान में आदिवासी परिवार क्यों उजड़ें?
</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/society/balaghat-32-tribal-children-death-fake-bmo-absconding">MP: 32 आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बड़ा खुलासा, 17 साल तक नौकरी करने वाला फर्जी BMO अब तक फरार</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/labour/mp-sanitation-workers-strike-in-datia-continues-for-the-second-day-allegations-of-collecting-15-lakh-each-in-exchange-for-jobs">MP: दतिया में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप</a></aside>]]></content:encoded></item><item><title>UP: दरोगा पर मारपीट का आरोप, शख्स ने खाया जहर, चौकी के बाहर शव रखकर परिजनों का प्रदर्शन</title><link>https://www.themooknayak.com/society/deoria-man-death-police-assault-allegation-protest-barhaj</link><comments>https://www.themooknayak.com/society/deoria-man-death-police-assault-allegation-protest-barhaj#comments</comments><guid isPermaLink="false">e2775006-bc26-41a9-ac45-423a6ac60ee5</guid><pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:27:27 +0530</pubDate><atom:updated>2026-10-13T12:27:27.254+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>Rajan Chaudhary</atom:name><atom:uri>/api/author/1715905</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="1536" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-13/o1wsyvz6/Deoria-Bhaluani-Police-Station-assault" width="2752"><media:title type="html"><![CDATA[ देवरिया में पुलिस पूछताछ के बाद शख्स की मौत पर भारी बवाल। परिजनों का आरोप है कि दरोगा की पिटाई व प्रताड़ना से आहत होकर उसने जान दी।]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ Deoria Bhaluani Police Station assault]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-13/o1wsyvz6/Deoria-Bhaluani-Police-Station-assault?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>Society</category><content:encoded><![CDATA[ <p><strong>उत्तर प्रदेश:</strong> देवरिया जिले के बरहज इलाके में रविवार को भारी तनाव का माहौल देखने को मिला। गौरा पुलिस चौकी के बाहर परिजनों और स्थानीय लोगों ने 50 वर्षीय अमरनाथ यादव का शव सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। परिवार वालों का गंभीर आरोप है कि पुलिस की पिटाई और प्रताड़ना के कारण ही अमरनाथ की जान गई है।</p><p>गौरा वार्ड के रहने वाले अमरनाथ की तबीयत शनिवार शाम अचानक बिगड़ गई थी। आनन-फानन में उन्हें पहले एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।</p><p>रविवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शाम करीब साढ़े चार बजे शव लेकर गौरा पुलिस चौकी पहुंचे और धरने पर बैठ गए। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दी और भलुअनी थाने में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। यह चक्काजाम लगभग एक घंटे तक चला, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति को संभाला।</p><p>परिजनों ने बताया कि अमरनाथ और उनकी पत्नी नीरज के बीच इस साल जून महीने से ही गहनों को लेकर घरेलू विवाद चल रहा था। विवाद के बाद पत्नी अपने मायके चली गई थीं और भलुअनी पुलिस से मामले की शिकायत की थी। मृतक के भाई का आरोप है कि 10 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाकर दरोगा ने अमरनाथ के साथ बदसलूकी और मारपीट की। आरोप है कि इसी अपमान से बुरी तरह आहत होकर उन्होंने जहर खा लिया।</p><p>इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस का कहना है कि मौत का स्पष्ट कारण अभी स्थापित नहीं हो सका है। बरहज के एसएचओ विशाल कुमार उपाध्याय ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। वहीं, बरहज की सीओ रंजना सचान ने पुलिस पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि थाने के सीसीटीवी फुटेज में टॉर्चर की कोई बात सामने नहीं आई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं।</p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/bharat/karnataka-hc-quashes-56-percent-reservation-siddaramaiah-attacks-bjp">कर्नाटक में 56% आरक्षण कानून रद्द होने पर भड़के सिद्धारमैया, बोले- 'आरक्षण खैरात नहीं, बीजेपी ने सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया था इस्तेमाल'</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/bharat/delhi-protest-live-updates">12 अक्टूबर Delhi Protest: 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Chaudhary</atom:name><atom:uri>/api/author/1715905</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="360" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2025-03-28/8z051owi/siddaramaiahac8d05.webp" width="640"><media:title type="html"><![CDATA[ सिद्धारमैया, पूर्व मुख्यमंत्री, कर्नाटक]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ सिद्धारमैया, पूर्व मुख्यमंत्री, कर्नाटक]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2025-03-28/8z051owi/siddaramaiahac8d05.webp?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>भारत</category><content:encoded><![CDATA[ <p>कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण बढ़ाने वाले कानून को रद्द किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को अदालत के इस कदम को हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए एक बहुत बड़ा और 'गंभीर झटका' करार दिया है।</p><p>इस रद्द किए गए कानून के तहत राज्य में एससी वर्ग का आरक्षण 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और एसटी वर्ग का कोटा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया था। इन नए बदलावों के लागू होने से राज्य का कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की तय सीमा को पार कर गया था।</p><p>न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए सिद्धारमैया ने भारतीय जनता पार्टी की मंशा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सामाजिक न्याय को लेकर बीजेपी की कार्यशैली पर कई बुनियादी सवाल खड़े करता है। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह कदम उठाया था, जबकि उन्हें अच्छी तरह पता था कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर जाएगा।</p><p>उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी ने इसकी संवैधानिक स्थिरता सुनिश्चित किए बिना ही बढ़े हुए आरक्षण की घोषणा क्यों की। सिद्धारमैया ने पूछा कि क्या स्थायी सामाजिक न्याय की तुलना में चुनावी फायदे को अधिक प्राथमिकता दी गई थी।</p><p>दशकों के संघर्ष का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया, क्योंकि केंद्र ने इस बढ़े हुए कोटे को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के कर्नाटक के अनुरोध को टाल दिया था। सिद्धारमैया ने साफ शब्दों में कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं है। उन्होंने 50 प्रतिशत की सीमा पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए राज्य सरकार से कानूनी उपाय आगे बढ़ाने का आग्रह किया।</p><p>इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अदालत के इस फैसले को एक गंभीर घटनाक्रम बताते हुए कहा कि इसका शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के क्षेत्र में व्यापक और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।</p><p>परमेश्वर ने अक्टूबर 2022 में इस कानून को लागू करने के तत्कालीन भाजपा सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। इसके साथ ही उन्होंने नौवीं अनुसूची के प्रस्ताव पर फैसला लटकाए रखने के लिए केंद्र सरकार की भी कड़ी आलोचना की।</p><p>उपमुख्यमंत्री ने आगे की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने सहित सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का बारीकी से परीक्षण करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि दलित और आदिवासी बच्चों के भविष्य को लंबी कानूनी अनिश्चितता में नहीं धकेला जा सकता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के व्यापक अवसर मिलने चाहिए।</p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/transgender-news/india-first-transgender-pg-doctor-ruth-john-paul-hyderabad">परिवार ने ठुकराया, अदालत में लड़ी जंग: डॉ. रूथ जॉन पॉल बनीं देश की पहली ट्रांसजेंडर पीजी डॉक्टर</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/society/balaghat-32-tribal-children-death-fake-bmo-absconding">MP: 32 आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बड़ा खुलासा, 17 साल तक नौकरी करने वाला फर्जी BMO अब तक फरार</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/bharat/jantar-mantar-protest-20-live-updates">जंतर-मंतर प्रोटेस्ट 2.0 Live Updates: नेहा बोरा को सफदरजंग के पास अरबिंदो मार्ग पर पुलिस ने रोका, बस के आगे लेट गये छात्र</a></aside>]]></content:encoded></item><item><title>कर्नाटक सरकार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका: SC/ST कोटा बढ़ोतरी &quot;असंवैधानिक&quot; करार</title><link>https://www.themooknayak.com/dalit/50-reservation-cap-is-binding-hc-strikes-down-sections-3-and-4-of-karnatakas-56-quota-law</link><comments>https://www.themooknayak.com/dalit/50-reservation-cap-is-binding-hc-strikes-down-sections-3-and-4-of-karnatakas-56-quota-law#comments</comments><guid isPermaLink="false">ed481b34-494a-4483-ac8d-6117270b3f8a</guid><pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:09:25 +0530</pubDate><atom:updated>2026-10-13T12:09:25.909+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>Geetha Sunil Pillai</atom:name><atom:uri>/api/author/1721627</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="675" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-03-28/1pqhweuk/Karnataka-HC-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F" width="1200"><media:title type="html"><![CDATA[ कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि कुल आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा एक बाध्यकारी संवैधानिक सिद्धांत है। यह सीमा सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में तय की थी और बाद के फैसलों में भी इसे बरकरार रखा गया है।]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ कर्नाटक हाईकोर्ट]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-03-28/1pqhweuk/Karnataka-HC-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>दलित</category><category>आदिवासी</category><content:encoded><![CDATA[ <p>नई दिल्ली- कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के आरक्षण को 50 प्रतिशत की सीमा से आगे बढ़ाने वाले कानून को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बढ़ोतरी "संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य" है।</p><p>मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने कर्नाटक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण) अधिनियम, 2022 की धारा 3 और धारा 4 को संविधान के विरुद्ध (अल्ट्रा वायरस) घोषित करते हुए रद्द कर दिया। </p><p>गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में 'इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ' मामले में फ़ैसला सुनाते हुए 50 प्रतिशत की सीमा तय की थी और बाद के फ़ैसलों में भी इसे बरकरार रखा गया।</p><h3>क्या था कानून</h3><p> कर्नाटक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण) अधिनियम, 2022 कर्नाटक सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून था, जिसका उद्देश्य राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना था। यह कानून पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में, बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में बनाया गया था।</p><p>धारा 3: शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण:</p><p>इस धारा के तहत, राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अनुसूचित जाति (SC) का आरक्षण 15% से बढ़ाकर 17% और अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण 3% से बढ़ाकर 7% किया गया था।</p><p>धारा 4: राज्य के अधीन सेवाओं (सरकारी नौकरियों) में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण</p><p>इस धारा के तहत, राज्य सरकार की सेवाओं और सरकारी नौकरियों में भी SC आरक्षण को 15% से 17% और ST आरक्षण को 3% से 7% किया गया था।</p><p>कुल प्रभाव: इस बढ़ोतरी के बाद कर्नाटक में एससी (17%), एसटी (7%) और अन्य पिछड़ा वर्ग/OBC (32%) को मिलाकर कुल आरक्षण 50% से बढ़कर 56% हो गया था।</p> <h3>हाई कोर्ट ने क्या कहा</h3><p>अदालत ने कहा कि यह बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है, जो कानून के समक्ष समानता की गारंटी देते हैं और भेदभाव पर रोक लगाते हैं। सरकारी सेवाओं में बढ़े हुए आरक्षण से जुड़े प्रावधान को भी रद्द किया गया। इसके लिए अदालत ने अनुच्छेद 16 का हवाला दिया, जो सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता का प्रावधान करता है।</p><p>अदालत ने माना कि कुल आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा एक बाध्यकारी संवैधानिक सिद्धांत है। यह सीमा सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में तय की थी और बाद के फैसलों में भी इसे बरकरार रखा गया है।</p><p>राज्य सरकार ने SC/ST के प्रतिनिधित्व से जुड़ी रिपोर्टों और सिफारिशों के आधार पर बढ़ोतरी को सही ठहराया था। लेकिन हाई कोर्ट ने कहा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व की चिंता अपने आप में तय सीमा को लांघने का आधार नहीं हो सकती।</p><p>कानून की संवैधानिक वैधता को याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई थी।</p><p>हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीनियर आईआरएस अफसर नेत्रपाल ने x पोस्ट पर लिखा, " कर्नाटक में SC/ST आरक्षण में 6% की बढ़ोतरी, जिससे कुल आरक्षण 50% से बढ़कर 56% हो गया था, उसे कर्नाटक हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। नौवीं अनुसूची में शामिल किए बिना 50% आरक्षण की सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। इस तर्क के आधार पर, तमिलनाडु के 69% आरक्षण के बने रहने की संभावना बहुत कम है। कई लोग तो यह भी कहते हैं कि वह भी टिकने लायक नहीं है। इसलिए, उन नेताओं की बातों पर भरोसा न करें जो आकर कहते हैं कि वे आरक्षण को 50% से ज़्यादा बढ़ा देंगे। फिलहाल ऐसा करना मुमकिन नहीं है।"</p><h3>अब आगे क्या </h3><p>राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी, जिनमें सुप्रीम कोर्ट में अपील भी शामिल है।</p><p>द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा की समीक्षा करने और बढ़े हुए कोटे को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के कर्नाटक के अनुरोध पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने पिछली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने प्रस्तावित संवैधानिक सुरक्षा हासिल किए बिना ही कानून बना दिया। केंद्र ने मामला हाई कोर्ट में लंबित होने के कारण नौवीं अनुसूची में शामिल करने का कर्नाटक का अनुरोध टाल दिया था।</p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/dalit/strong-voices-raised-to-protect-special-reservation-in-scp-medical-colleges-mass-pledge-not-to-vote-in-upcoming-elections-if-law-is-not-made">SCP मेडिकल कॉलेजों में विशेष आरक्षण की सुरक्षा के लिए उठी बुलंद आवाज़; कानून नहीं बना तो आगामी चुनाव में वोट न देने की सामूहिक प्रतिज्ञा</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/obc-news/tm-exclusive-high-court-strikes-down-27-obc-reservation-in-madhya-pradesh-could-constitutional-protection-have-been-secured-if-the-reservation-were-placed-under-the-ninth-schedule">TM Exclusive: मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण हाईकोर्ट ने किया रद्द, यदि 9वीं अनुसूची में होता रिजर्वेशन तो क्या मिल सकता था संवैधानिक संरक्षण??</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/obc-news/obcs-in-madhya-pradesh-to-now-receive-14-reservation-high-court-strikes-down-the-27-law-and-directs-that-the-13-held-posts-be-filled-from-the-unreserved-category">मध्य प्रदेश में OBC को अब 14% आरक्षण, हाईकोर्ट ने 27% का कानून किया निरस्त; 13% होल्ड पद अनारक्षित वर्ग से भरने के निर्देश</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/governance/supreme-court-rejects-ap-govt-plea-34-percent-bc-reservation">सुप्रीम कोर्ट का आंध्र प्रदेश सरकार को बड़ा झटका: स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 34% आरक्षण की याचिका खारिज</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/dalit/demand-for-reservation-in-private-sector-aiisca-president-says-reservation-is-not-charity-it-is-the-only-thread-binding-us-to-the-state">निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग: AIISCA अध्यक्ष  बोले "आरक्षण चैरिटी नहीं, राज्य से जोड़ने वाला एकमात्र धागा"</a></aside>]]></content:encoded></item><item><title>12 अक्टूबर Delhi Protest: &apos;मार्च फॉर डेमोक्रेसी&apos; में उमड़ा जन सैलाब; मोदी-शाह के खिलाफ़ दिखा आक्रोश</title><link>https://www.themooknayak.com/bharat/delhi-protest-live-updates</link><comments>https://www.themooknayak.com/bharat/delhi-protest-live-updates#comments</comments><guid isPermaLink="false">b20e8c79-b03e-4f2a-b828-b29c83462ed9</guid><pubDate>Mon, 12 Oct 2026 15:44:24 +0530</pubDate><atom:updated>2026-10-12T19:40:06.119+05:30</atom:updated><atom:author><atom:name>Rajan Chaudhary</atom:name><atom:uri>/api/author/1715905</atom:uri></atom:author><description></description><media:keywords></media:keywords><media:content height="2731" url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-12/fmplmbb1/000.jpeg" width="4096"><media:title type="html"><![CDATA[ बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में उमड़ा जन सैलाब, भीड़ ने लगाये नारे, " वोट चोर, गद्दी छोड़"]]></media:title><media:description type="html"><![CDATA[ दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन और रैलियों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान (पूर्वी दिल्ली) को अधिसूचित किया, जंतर मंतर डिनोटिफाईड]]></media:description></media:content><media:thumbnail url="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-12/fmplmbb1/000.jpeg?w=280" width="280"></media:thumbnail><category>भारत</category><content:encoded><![CDATA[ <h3>हम 'वोट चोरों' को नहीं बख्शेंगे: खरगे </h3><p>कांग्रेस मार्च सुप्रीम कोर्ट पहुँचने के बाद सभी प्रमुख नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोले, "हम 'वोट चोरों' को बख्शेंगे नहीं, उनके खिलाफ पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।" RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "सभी विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं... हम लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं..."। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा कल आगे की रणनीति तय की जाएगी।" शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, "हम जनता के साथ यहां आ गए। हमें सुप्रीम कोर्ट पर उम्मीद रखनी चाहिए।" सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।</p><h3>सुप्रीम कोर्ट पहुंचा इंडिया ब्लॉक का काफिला, 2.5 लाख भीड़ का दावा </h3><p>बाराखंभा से सोमवार अपरान्ह रवाना हुई इंडिया ब्लॉक की रैली सुप्रीम कोर्ट पहुंची, सुप्रीम कोर्ट में INDIA ब्लॉक के नेता, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे। एनएसयूआई के आधिकारिक अकाउंट से किये एक पोस्ट में इस मार्च में करीब 2.5 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। पोस्ट में कहा गया कि दिल्ली इस तरह के जोश के लिए तैयार नहीं थी! सड़कें खचाखच भरी हैं, माहौल ज़बरदस्त है और संदेश साफ़ है - लोकतंत्र की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता!</p><h3>नेहा की ढाल बने राहुल गाँधी </h3><p>बीते तीन दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रही आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ जहां रोज ही पुलिस ज़ोर जबरदस्ती करती दिखाई दी थी, वहीं आज कांग्रेस मार्च में नेहा राहुल गाँधी और प्रियंका के साथ आगे आगे चल रही थी, जब भीड़ बढ़ी तो राहुल गांधी उनकी ढाल बनकर उन्हें कवर देते हुए उनके पीछे चलते दिखाई दिए।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">Massive crowd have hit the streets on the call of LoP Rahul Gandhi <br><br>March for Democracy ✌ <a href="https://t.co/QXuDfmQA1J">pic.twitter.com/QXuDfmQA1J</a></p>&mdash; NSUI (@nsui) <a href="https://x.com/nsui/status/2109601834327548390?ref_src=twsrc%5Etfw">October 12, 2026</a></blockquote>
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</figure><h3>यूथ कांग्रेस ने बांटे बैटमैन के मास्क </h3><p>यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच बैटमैन के मास्क बांटे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बगल में बैठे हुए बैटमैन का मास्क पहने हुए दिखाई दिए। </p><figure><img alt="" src="https://cf-images.assettype.com/themooknayak/2026-10-12/i1w1osei/00-.png" /><figcaption>राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खरगे को पहनाया बैटमैन वाला मास्क </figcaption></figure><h3>वकीलों के साथ बदसलूकी पर 13 अक्टूबर को सफेद रिबन लगाकर SCBA करेगा विरोध </h3><p>सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने फ़ैसला किया है कि वकील 13 अक्टूबर को अपने कोट पर सफ़ेद रिबन लगाकर उन साथी वकीलों के साथ एकजुटता दिखा सकते हैं, जिनके साथ पुलिस ने कथित तौर पर बुरा बर्ताव और धक्का-मुक्की की थी। सोमवार को जारी एक सर्कुलर में, SCBA ने सदस्यों से यह भी कहा है कि वे मंगलवार दोपहर 1:15 बजे गांधी जी की मूर्ति के पास इकट्ठा हों और एक मिनट का मौन रखें। यह फ़ैसला 10 अक्टूबर के प्रस्ताव के बाद SCBA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के ज़्यादातर सदस्यों ने लिया।</p><h3>AAP सांसद संजय सिंह को दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन </h3><p>दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और मंत्री सौरभ भारद्वाज सहित कई नेताओं को जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास से हिरासत में लिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और वोटर लिस्ट/SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और बहस भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने संजय सिंह और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">AAP सांसद संजय सिंह को कुछ इस तरह से आज हिरासत में लिया गया! <a href="https://t.co/8vhDBAWI1r">pic.twitter.com/8vhDBAWI1r</a></p>&mdash; The Mooknayak (@The_Mooknayak) <a href="https://x.com/The_Mooknayak/status/2109618303312507214?ref_src=twsrc%5Etfw">October 12, 2026</a></blockquote>
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</figure><h3>संवैधानिक पदों का बेशर्मी से अपमान करना निंदनीय: किरेन रिजिजू </h3><p>INDIA ब्लॉक द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च को लेकर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने निंदा की. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में रिजिजू ने कहा, "विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक पदों का बेशर्मी से अपमान करना निंदनीय है। कांग्रेस पार्टी अभी दिशाहीन है। लेकिन अगर उन्हें कोई परिपक्व और समर्पित नेता मिल जाए जिसे साल में 200 छुट्टियां मनाने का शौक न हो तो वे अपनी स्थिति बेहतर कर सकते हैं!"</p><h3>राहुल गांधी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल</h3><p>दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं का सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च जारी है. इस बीच राहुल गांधी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो गई है और आधिकारिक रूप से रजिस्टर भी हो गई है. याचिका में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेता याचिकाकर्ता हैं। इसमें चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पार्टी बनाया गया है।  </p><p>रविवार को विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखा था और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। लेकिन सीजेआई ने मिलने से इनकार कर दिया था और याचिका दाखिल करने के लिए कहा था।</p><h3>अखिलेश यादव: डेमोक्रेसी को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी, धरना प्रदर्शन चलता रहेगा</h3><p>I.N.D.I.A ब्लॉक के विरोध मार्च पर समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने कहा, "आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जारी रहेंगे। डेमोक्रेसी को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है; भारतीय जनता पार्टी, इलेक्शन कमीशन के साथ मिलकर, संविधान और डेमोक्रेसी को खत्म करना चाहती है। वे हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं। वे नकली वोटर लिस्ट बनाते हैं, बोगस वोट डालते हैं, और चुनाव के नतीजे बनाते हैं..."</p><h3>सुप्रीम कोर्ट के वकील भी मार्च में शामिल </h3><p>इंडिया ब्लॉक की अगुवाई में शुरू हुए मार्च फॉर डेमोक्रेसी में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी शामिल हुए, वोट चोरी के विरोध में हो रहे इस मार्च में वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "...ये कोई विरोध मार्च नहीं है। हम एक सिद्धांत के लिए जा रहे हैं।"</p><h3>राहुल गांधी ने शुरू किया पैदल मार्च </h3><p>SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च शुरू हो गया है। राहुल समेत विपक्ष के नेता बस से उतरकर पैदल मार्च कर रहे हैं। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजस्वी यादव, आइसा की नेता नेहा बोरा भी शामिल हैं। मार्च के पहले राहुल गांधी ने 40 मिनट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष का मार्च शिवजी की बारात की तरह है, इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।</p><p>मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल बोले, " दिल्ली को किला बना दिया गया है, नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार, ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। पुलिसवाले कह रहे हैं-हम से देश के युवाओं को पिटवाया जा रहा है, लेकिन RSS के लोगों को फ्री घूमने दिया जा रहा है। यही BJP-RSS के गुंडे महिलाओं को मार रहे हैं।"</p><h3>यह शक्ति प्रदर्शन नहीं;  इलेक्शन सिस्टम के खिलाफ सबसे बड़ा विरोध: वेणुगोपाल </h3><p>'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' को लेकर कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने कहा: यह कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है। यह चीफ इलेक्शन कमिश्नर और इलेक्शन सिस्टम के खिलाफ सबसे बड़ा विरोध है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस देश की डेमोक्रेसी को खत्म करने के लिए CEC को अपने टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।</p><p>हम सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन फाइल करने जा रहे हैं। ;हमारी लड़ाई CJI या SC के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई CEC, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ है जो इस देश की डेमोक्रेटिक वैल्यू और उसूलों को खत्म कर रहे हैं।</p><h3>इंडिया ब्लॉक का मार्च फॉर डेमोक्रेसी, आइसा और भाकपा भी  साथ </h3><p>INDIA Alliance के नेता, सांसद और विपक्ष के अन्य प्रतिनिधि, CPI(ML) लिबरेशन के जनरल सेक्रेटरी दीपांकर भट्टाचार्य, PBM रवि राय, AISA प्रेसिडेंट नेहा और CPI(ML) लीडर बालाजी आदि के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च शुरू करने के लिए मंडी हाउस पहुंचने की जानकारी है।</p><p>बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक  मार्च के बाद CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR प्रोसेस पर तुरंत रोक लगाने और डेमोक्रेटिक आवाज़ों पर पुलिस के दबाव को खत्म करने की मांग वाली एक पिटीशन सबमिट की जाएगी।</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">Watch Live : March For Democracy | Barakhamba Road to Supreme Court, New Delhi <a href="https://t.co/MVtwfAd9j5">https://t.co/MVtwfAd9j5</a></p>&mdash; Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) <a href="https://x.com/ashokgehlot51/status/2109573209595281766?ref_src=twsrc%5Etfw">October 12, 2026</a></blockquote>
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</figure><h3>जंतर मंतर को प्रोटेस्ट साईट डिनोटिफाई करने पर CJP गुस्सा </h3><p>जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर सीजेपी टीम ने नाराजगी जाहिर की है. पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने एक बयान में कहा, "जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। क्या गृह मंत्रालय ने भारत के लोगों से सलाह ली? क्या किसी स्टेकहोल्डर से सलाह ली गई? क्या किसी ऑर्गनाइज़ेशन से सलाह ली गई? लिखकर ले लो- जैसे वे लोगों के जंतर-मंतर को डीनोटिफ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में डेमोक्रेसी को डीनोटिफ़ाई करेंगे। यह कदम उसी तरफ़ एक कदम है। हम इस मनमाने फ़ैसले को मंज़ूर नहीं करते। यह लोगों के विरोध करने और शांति से इकट्ठा होने के बुनियादी अधिकार पर हमला है। अब पूरा देश जंतर-मंतर बन रहा है!</p><figure><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">Today, Modi denotified Jantar Mantar as a  designated protest site. <br><br>Tomorrow, he will denotify democracy itself.<br><br>The dictator’s problem was never the protest site. It was the very idea of people protesting.</p>&mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) <a href="https://x.com/abhijeet_dipke/status/2109562169025311113?ref_src=twsrc%5Etfw">October 12, 2026</a></blockquote>
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</figure><h3>जंतर-मंतर पर अब विरोध-प्रदर्शन नहीं होंगे</h3><p>गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया। अब विरोध-प्रदर्शन और रैलियों के लिए ये तीन अधिसूचित स्थान रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान (पूर्वी दिल्ली) ही रहेंगे. दिल्ली पुलिस के अनुसार इन तीन जगहों पर प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए डिटेल SOP अलग से जारी करेगी।  </p><aside><a href="https://www.themooknayak.com/women-news/he-planned-for-one-child-but-neha-bora-made-him-wish-for-another-daughter">एक ही संतान का किया था फैसला, नेहा बोरा को देखकर एक पिता बोले, "काश मेरी एक और बेटी होती"</a></aside><aside><a href="https://www.themooknayak.com/governance/manhandled-dragged-assaulted-mp-john-brittas-write-to-prez-murmu-for-impartial-inquiry-and-action">“अगर एक सांसद को मीडिया से बात करते हुए पीटा जा सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की क्या उम्मीद करे?”: जॉन ब्रिटास</a></aside>]]></content:encoded></item></channel></rss>