‘लू’ को लेकर कई राज्यों में रेड अलर्ट, जानिए क्या हो सकते हैं नुकसान?

अनुमान है कि, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में भी लू की स्थिति हो सकती है। इन राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी की गई है।
कई राज्यों में रेड अलर्ट
कई राज्यों में रेड अलर्टGraphic- The Mooknayak
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नई दिल्ली: भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से में पिछले कई दिनों से लगातार गर्म तापमान के बढ़ने की ख़बरें सामने आ रहीं हैं. शनिवार को राजस्थान के कई हिस्से, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, असम के कुछ इलाकों, जम्मू कश्मीर व मध्य प्रदेश में कई जगहों पर लू असामान्य स्थिति में महसूस किया गया। अनुमान है कि, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में भी लू की स्थिति हो सकती है। इन राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान के फलौदी में अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे पहले पांच मई 2016 में यहां पारा 51 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। राजस्थान में यह छठा मौका है जबकि पारा 50 डिग्री या इससे ऊपर गया है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान रेमल को लेकर नारंगी चेतावनी जारी की गई है।

भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि देश के उत्तर-पश्चिम हिस्सों मध्य भारत और पूर्वी इलाकों में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। मैदान से लेकर पहाड़ी इलाके तक लू की चपेट में हैं। राजस्थान के कई हिस्सों, पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों और गुजरात में भीषण से लू चल रही है। राजस्थान के फलोदी (पश्चिमी राजस्थान) में इस 50 डिग्री तापमान रहा और अगले पांच दिन तक लू का कहर जारी रहने की संभावना है। 

इससे पहले चुरू में एक जून 2019 में पारा 50.8 डिग्री पहुंचा था। अलवर में 10 मई 1956 में पारा 50.6 डिग्री और धौलपुर में तीन जून 1995 और श्रीगंगानगर में 14 जून 1934 को पारा 50 डिग्री पहुंचा था।

मौसम विभाग ने बताया कि शनिवार को राज्य में फलौदी 50 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 48.8 डिग्री, जैसलमेर में 48 डिग्री, बीकानेर में 47.2 डिग्री, चूरू में 47 डिग्री, जोधपुर में 46.9 डिग्री, गंगानगर में 46.5 डिग्री, कोटा में 46.3 डिग्री और राजधानी जयपुर में 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला कलेक्टर को राज्य में लू से आमजन एवं पशु-पक्षियों को राहत प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला कलेक्टर को सुचारू व्यवस्था के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। राज्य में जारी लू तथा उष्ण रात्रि का दौर आगामी तीन-चार दिन जारी रहने की प्रबल संभावना है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, दिल्ली सहित कई इलाकों में तापमान सामान्य से दो से पांच या सात डिग्री ऊपर दर्ज किया गया। हिमाचल व जम्मू कश्मीर सहित असम व अन्य हिमालयी राज्यों में भी लू चली।

वहीं अगले दो दिनों के दौरान दक्षिण बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों, मध्य बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं।

खाड़ी में बना चक्रवाती दबाओं का क्षेत्र उत्तर दिशा में आगे बढ़ना जारी रख सकता है जो उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। गहरे दबाव का क्षेत्र उत्तर और उससे सटे पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान रेमल (रे-मल के रूप में उच्चारित) में तब्दील हो गया है। यह 26 मई को यह एक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल कर और तेज हो सकता है।

एक गंभीर चक्रवात के रूप में सागर द्वीप और खेपुपारा के बीच बांग्लादेश और निकटवर्ती पश्चिम बंगाल तट को पार कर सकता है। पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण भारत में भारी बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ीं। दक्षिणी मध्य महाराष्ट्र, ओड़ीशा, तेलंगाना, सिक्किम और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हुई। मराठवाड़ा, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और पूर्वी बिहार में हल्की बारिश हुई। 

विभाग का अनुमान है कि गंगीय पश्चिम बंगाल में मध्यम बारिश और गरज के साथ कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। 26 से 27 मई के बीच पश्चिम बंगाल और ओड़ीशा तट पर समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब हो सकती है समुद्र में ऊंची लहरें हो सकती है।

‘लू’ से होने वाले संभावित नुकसान

दिल्ली के मदनगीर इलाके में निजी क्लीनिक चलाने वाले फिजिशियन और चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर बी.वी. सिंह ने कुछ दिन पहले द मूकनायक को लू से बचाव के कुछ टिप्स बताए थे. वह बताते हैं कि, “जब लू चलती है तब सबसे पहले उससे खुद का बचाव करते हुए शरीर पूरा ढककर बाहर जाना चाहिए. सूती कपड़े पहनने चाहिए. इसके अलावा टोपी या छाता लेकर भी घर से बाहर निकल सकते हैं.”

वह आगे बताते हैं कि, “बाहर खाली पेट न निकलने, कुछ खा ही बाहर जाएं. साथ में पानी की बोतल रखें.”

लू लगने या ज्यादा लू चलने की दशा में वह सलाह देते हैं कि, “जरुरी न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें. अगर जाना पड़े तो उक्त सावधानियों के साथ ही बाहर निकलें. अगर किसी को महसूस हो रहा है कि उसे लू लगी है तो तुरंत उसे डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए.”

उन्होंने लू के लक्षण की पहचान के बारे में बताया कि, “लू लगने पर स्किन (त्वचा) लाल पड़ने लगती है. स्किन सूख जाती है, व्यक्ति को पसीना नहीं आता. शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. जैसे जैसे समय बीतेगा. सर दर्द होगा और चक्कर आने लगता है. ज्यादा लू की वजह से हार्ट फेल के चांस भी बढ़ जाते हैं.”

डॉक्टर बी.वी. सिंह लू के बचाव के लिए कुछ अन्य टिप्स भी बताते हैं जैसे- धूप से आने के तुरंत बाद एसी रूम में न बैठें. शरीर को थोड़ा सामान्य होने दें. घर में अगर दही है, तरबूज है, छाछ है या सत्तू है तो उसका सेवन करें.

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