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यदि किसी मामले में दुरुपयोग मिलता है तो उचित सुधारात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
Geetha Sunil Pillai
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एडवोकेट संतोष दोहरे और परिवार को अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत कुल ₹23,36,250 की राहत/वित्तीय सहायता मिलने के मामलों की तीन महीने में जांच का आदेश
निशु के घर पर पथराव की सूचना के बाद आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता उससे मिलने घर पहुंचे
अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।
Dalit youth murder Uttarakhand
पोस्टर में चार सामाजिक समूहों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
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