दलित समुदाय का आरोप है कि उनके साथ ऐसा अपमानजनक बर्ताव हर साल होता है। जुलूस कभी उनकी बस्ती में प्रवेश नहीं करती और अगर वे मंदिर जाते हैं, तो उन्हें दूर ही खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ता है।

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