हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संसद की शक्ति जाति को सूची से बाहर करने की है, लेकिन यह शक्ति पहले से अर्जित व्यक्तिगत संवैधानिक अधिकारों को नष्ट नहीं कर सकती। जाति जन्म से है और आजीवन बनी रहती है।

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