कोर्ट ने कहा, “यदि पक्षकार स्वयं स्वीकार करते हैं कि वे हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हैं और विवाह सप्तपदी सहित हिंदू संस्कारों के अनुसार संपन्न हुआ है, तो उन्हें रिवाज अदालतों में नहीं भेजा जा सकता ...
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत का स्पष्ट संदेश: न्यायपालिका में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व कोई रियायत नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक और समान अधिकार है।
रायगढ़ के खरसिया में पुलिस पूछताछ के दौरान संदिग्ध की मौत पर भारी बवाल, परिजनों के हाईवे जाम के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश; थाना प्रभारी और 2 आरक्षक लाइन अटैच।