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अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।
Geetha Sunil Pillai
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पड़ोसियों के मुताबिक शनिवार को बाहर लोग खड़े थे, पत्थरबाजी नहीं हुई। एक पड़ोसन, जिनकी बालकनी निशु वाले घर से सटी बताई गई, कहती हैं कि उनके घर एक कंकड़ भी नहीं आया, शीशा नहीं टूटा, आवाज़ नहीं आई।
Dalit youth murder Uttarakhand
पोस्टर में चार सामाजिक समूहों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
निशु आजाद गाजियाबाद की दलित परिवार से आने वाली किशोरी कंटेंट क्रिएटर हैं। वे जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन में दिखीं, अंबेडकराइट पहचान सार्वजनिक रखती हैं और सोशल मीडिया पर जाति-अन्याय व छात्र मुद्दों पर बोलती हैं।
Meerut News, Dalit Lawyer Ravi Gautam
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