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TM Exclusive: एमपी में दलित दूल्हे हो रहे जातिवाद का शिकार! ASP नेता का उज्जैन से CM हाउस भोपाल तक घोड़े पर कूच का ऐलान
Ankit Pachauri
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सुनील अस्तेय का बड़ा बयान- “सरकार अंधी, बहरी और गूंगी हो चुकी है”; दमोह, टीकमगढ़ और छतरपुर की घटनाओं ने फिर उठाए सवाल
महेश राठौड़ अपने बुजुर्ग चाचा के इलाज के लिए आए थे। भूख मिटाने के लिए वे अस्पताल परिसर में ही चल रही मुफ्त भोजनशाला में जा बैठे, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण जब वे थोड़ा सा बचा हुआ भोजन फेंकने लगे, तो वहीं खड़े संगठन के संचालक की नजरों में यह 'बर्बादी' ऐसी खल गई कि उसने युवक की जाति पूछी और फिर प्लास्टिक के पाइपों से पिटवाकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
सिर्फ जाति ही नहीं, बल्कि लैंगिक और रंग के आधार पर भी कलाकारों ने भेदभाव की शिकायत की है।
परिवार के साथ बागेश्वर धाम पहुंचे पूर्व CJI बी आर गवई ने धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात कर उनके सामाजिक कार्यों की सराहना की।
"हम दलित-पिछड़े हैं, अब हम फिर से मटका और झाड़ू लेकर चलेंगे. इस सरकार में यही हमारा भविष्य है, यही हमारा भूत काल था", विवश और निराश होकर प्रदर्शनकारी मीडिया के सामने फूट पड़े।
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